बेल (Bail) या जमानत क्या होती है ओर केसे मिलती है। 1 पूरी जानकारी

बेल या जमानत क्या होती है और न्ययालय द्वारा कैसे ली जाती है। बेल या जमानत की परिभाषा क्या होती है ये हम आपको बताएंगे जो कानून की किताबों में भी नही लिखी हुई है।दण्ड प्रक्रिया संहिता मैं भी जमानत या बेल को कही भी परिभाषित नही किया गया है।

हमारे समाज मे लोग साक्षर होते हुए भी कुछ गलतियां या अपराध कर देते है। अपराध होने के पश्चात पुलिस थाने मैं फिर दर्ज हो जाती है।उसके बाद पुलिस उस केस की जाँच करती है। ओर अपराधी को पुलिस द्वारा 24 घण्टे के अंदर न्ययालय में पेश किया जाता है।

उस समय अपराधी को जमानत क्या होती है।ये नही पता होता और केसे ली जाती है।उन्हें एक नेक व निपुण वकील की सलाह लेते है।फिर वह वकील उनकी सहायता करते है।बाकी हम अब विस्तार से आपको बताते है कि। जमानत क्या होती है कैसे ली जाती है और कितने प्रकार की होती है। पूरा आपको विस्तार इसका वर्णन करते है।

बेल या जमानत क्या है

बेल या जमानत हमारे समाज मे दिन प्रतिदिन अपराधो की संख्या बड़ती जा रही है। जब कोई अपराधी किसी कारणवश कारागृह या जेल में बंद होता है तो उस अपराधी को कारागृह या जेल छुडवाने के लिए उसी अभियुक्त के वकील द्वारा न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल करता है।

उस जमानत प्रार्थना पत्र के आधार देखते हुए न्ययालय आदेश जारी करता है।उसे बेल या जमानत कहते है जमानती अपराधों मे जमानत पुलिस द्वारा भी ली जा सकती है। 

जमानत कितने प्रकार की होती है

जमानत दो प्रकार की होती है।

  • 1 अग्रिम जमानत (Anticipstory Bail)
  • 2 रेगुलर जमानत (Regular Bail)

 

अग्रिम जमानत (Anticipstory Bail)

अग्रिम जमानत से तात्पर्य है कि किसी व्यक्ति को अगर पहले से आशंका हो जाती है कि उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। तो वह उसके अधिवक्ता द्वारा धारा 438 दण्ड प्रक्रिया संहिता का प्रार्थना-पत्र न्ययालय में दाखिल किया जाता है।

अग्रिम जमानत हमेशा सत्र न्यायाधीश द्वारा विचारणीय होती है। यदि न्ययालय द्वारा अभियुक्त को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी जाती है। तो अगले आदेश तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार नही किया जा सकता। अग्रिम जमानत के पश्चात पुलिस को भी न्ययालय के आदेश की तहरीर दी जाती है।

रेगुलर जमानत (Regular Bail

रेगुलर जमानत क्या होती है।रेगुलर जमानत से तात्पर्य है कि की किसी व्यक्ति के विरुद्ध अगर न्ययालय में कोई मुकदमा पेंडिग हो। तो अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय मे धारा 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता का प्रार्थना-पत्र दाखिल किया जाता है। ओर न्यायालय द्वारा अभियुक्त के प्रार्थना-पत्र पर आदेश कर दिया जाता है।

इसमे अभियुक्त को अंतरिम जमानत दी जाती है।या रेगुलर बेल दी जाती है।उसे रेगुलर बेल कहते है। न्ययालय द्वारा अभियुक्त का जमानत मुचलका भरवाया जाता है। अगर न्ययालय ने 20 हजार की जमानत मांगी है तो। तो वही व्यक्ति आपकी जमानत दे सकता है जिसके पास 20 हजार की स्वम की कोई संपति हो।ओर जमानत के दौरान अभियुक्त को न्ययालय के निर्देशो की पालना करना अनिवार्य होता है।

 

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पुलिस द्वारा चार्जशिट दाखिल नही करना

 पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल ना करना अगल अलग मुकदमों मैं अलग अलग टाइम दिया हुआ है कानून में चार्जशीट दाखिल करने का  पुलिस को अभियुक्त को गिरफ्तारी होने के दिन से पुलिस के पास 90 दिन का समय होता है

चार्जशीट न्ययालय के समक्ष प्रसतुत करने का।यदि आरोपी को 10 वर्ष से कम की सज़ा हो सकती है।इन परिस्थिति तो पुलिस द्वारा 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य हो जाता है।

अगर पुलिस न्यायालय मे चार्जशीट समय पर दाखिल नही करती है। तो अभियुक्त को न्यायालय द्वारा बेल या जमानत दी जा सकती है।चाहे गम्भीर मामला हि क्यों न हो।

अपराध कितने प्रकार के होते है

अपराध कितने प्रकार के होते है।कानून की नजर मैं अपराध 2 प्रकार के होते है। जिनका विस्तार से हम वर्णन देखते है।

  • 1 जमानती अपराध (Bailable Offense)
  • 2 गैर जमानती अपराध (Non Bailable Offense)

जमानती अपराध (Bailable Offense)

दोस्तो इसमे हम आपको पूरा विस्तार से बताएंगे कि जमानती अपराध (Bailable Offense) क्या होते है और कौन कौन से अपराध इस श्रेणी में आते है। जैसे कि लड़ाई झगड़ा करना,मारपीट,धमकी देना करने लापरवाही से तेज गति से वाहन से मौत आदि ये सब जमानती अपराधों की श्रेणी मे आते है।

भारतीय कानून की दण्ड प्रक्रिया संहिता में इन अपराधों को उस श्रेणी में लिया गया है जिसमे 3 वर्ष या इससे कम की सज़ा का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियों में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 169 अनुसार थाने में है जमानत प्रदान करने के प्रावधान है।

पुलिस थाना इंचार्ज अभियुक्त से बैल बांड भरवाकर थाने से जमानत दे सकता है।ओर जमानती अपराध मे अभियुक्त को न्ययालय से भी दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 436 के अंतर्गत न्ययालय भी जमानत दे सकता है।

गैर जमानती अपराध (Non Bailable Offense)

दोस्तो इसमे हम आपको पूरा विस्तार से बताएंगे किदोस्तो इसमे हम आपको पूरा विस्तार से बताएंगे कि गैर जमानती अपराध ( Non Bailable Offense) क्या होते है और कौन कौन से अपराध इस श्रेणी में आते है।

जैसे कि रेप, अपहरण डकैती,लूट हत्या या हत्या का प्रयास ये सभी गैर जमानती अपराधों की श्रेणी मे आते है।।जिनका न्यायालय में तथ्यो के आधार पर न्ययालय जमानत का निर्णय लेता है।

अगर न्यायालय को लगता है कि अपराध उम्र कैद की सजा हो सकती है।तो न्ययालय द्वारा जमानत खारिज कर दी जाती है।सेशन न्यायधीश न्ययालय में किसी भी मामले मे जमानत स्वीकार कर सकता है।

अगर किसी मामले मे आपको जमानत लेनी होती है तो दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 के अंतर्गत कोई स्त्री या मानसिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति कोई गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को अधिवक्ता द्वारा  तथ्यों और सबूतो के अधार पर न्यायालय मे अपनी दलीलो मे आपका पक्ष रख कर न्यायालय से जमानत प्रदान करवा देता है।ओर डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट भी बहुत अहम भूमिका निभाती है।।जिसके द्वारा न्यायालय द्वारा आपकी जमानत स्वीकार कर ली जाती है। 

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