वैध एग्रीमेंट किसे माना गया है Who is Considered a valid Agreement? 1 पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तो

आज हम बात करने जा रहे है एग्रीमेंट की क्या होता है कब एग्रीमेंट वैध माना जाता है। इस विषय पर हम कुछ चर्चा करने वाले हैं। एग्रीमेंट का साधारण भाषा में तात्पर्य होता है की किसी भी किसी भी कार्य के लिए दोनों पक्षकारों का आपसी सहमति से किया गया इकरारनामा या एग्रीमेंट

जैसे कि हम किसी गाड़ी का बेचान कर रहे हैं तो बेचान करने वाले प्रथम पक्ष व गाड़ी खरीद करने वाले द्वितीय पक्ष के बीच में एग्रीमेंट किया जाता हैएग्रीमेंट हमेशा ₹500 या 1000 रुपए के स्टांप जी वैध माना जाता है एग्रीमेंट करते समय दोनों पक्ष कार सहमत होने चाहिए एवं दोनों पक्षकारों पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए इस प्रकार एग्रीमेंट दोनों पक्षकारों के मध्य किया जाता है जिसकी हम विस्तार से चर्चा निम्न प्रकार से करेंगे।

एग्रीमेंट क्या हैं?

भारतीय संविदा अधिनियम 1872 के अनुसार एग्रीमेंट उसे कहा गया है कि किसी भी कार्य करने के लिए दोनों पक्षकारों के मध्य जो लिखित रूप से कानूनी प्रक्रिया द्वारा करार किया जाता है उसे एग्रीमेंट कहा जाता है एग्रीमेंट दोनों पक्ष करोगी आपसी सहमति से किया जाता है ना किसी के दबाव में ना किसी की धमकी के द्वारा एग्रीमेंट किया जाता है

किसी भी वस्तु गाड़ी संपत्ति इटली चीजों को क्रय विक्रय करने के लिए एग्रीमेंट करा जाता है जिसमें एग्रीमेंट के साथ पूर्ण रूप से दोनों पक्षकारों की शर्ते अंकित होती हैं जो कि दोनों पक्ष करो द्वारा अच्छे से पढ़कर और सोच समझकर हस्ताक्षर किए जाते हैं उसके पश्चात विधि द्वारा अधिकृत नोटरी पब्लिक के द्वारा उस एग्रीमेंट को जरिए नोटरी अटेस्टेड करवाया जाता 

एग्रीमेंट हमेशा दो पक्षकारों के बीच होता है एग्रीमेंट करने वाला जैसे कि किसी को अपनी गाड़ी पहचान करनी है तो वह प्रस्ताव कर्ता कहा जाता है एवं दूसरे पक्ष कार को प्रस्ताव स्वीकार कर्ता कहा जाता है इन दोनों पक्षों के मध्य आपसी सहमति से जो इकरारनामा होता है

वैध एग्रीमेंट किसे माना गया है?

वैद्य एग्रीमेंट किसे माना गया है यह हम आपको बताने जा रहे हैं एग्रीमेंट दो पक्षों के मध्य किया जाता है या दो पक्षकारों के मध्य किया जाने वाला लिखित करार एग्रीमेंट माना जाता है यह जब ही वैध माना जाएगा जब कानूनी रूप से यह सही होगा और वैद्य एग्रीमेंट किसे माना गया है 

वैद्य एग्रीमेंट बनाते समय या कोई इकरारनामा करते समय किन किन बातों को ध्यान में रखने योग्य है जो निम्न प्रकार से आपको पूर्ण रूप से चर्चा करेंगे

एग्रीमेंट करते समय ध्यान में रखने वाली बातें निम्न प्रकार है?

  1. एग्रीमेंट बनाते समय हमेशा दो पक्षकारों की आवश्यकता होती है दोनों पक्षकारों के मध्य जो लिखित करार होता है उस एग्रीमेंट कहा जाता है एग्रीमेंट के समय दोनों पक्षकारों का उपस्थित होना अति आवश्यक है
  2. एग्रीमेंट बनाते समय पक्षकारों के मध्य आपसी सहमति से होना चाहिए दोनों पक्षकारों में से किसी भी प्रकार के ऊपर कोई दबाव या धमकी प्रभाव नहीं होना चाहिए
  3. एग्रीमेंट बनाते समय यह ध्यान रखने वाली बात है कि दोनों पक्ष करूंगा वयस्क होना अति आवश्यक है दोनों पक्षकारों की आयु 18 वर्ष से ऊपर ही होनी चाहिए और दोनों पक्ष करोगी मानसिक व शादी की स्थिति सही होनी चाहिए।
  4. एग्रीमेंट बनाते समय दोनों पक्षकारों को आपसी सहमति से जिस वस्तु संपत्ति या किसी लेनदेन या किसी गाड़ी बेचान इत्यादि किसी का भी एग्रीमेंट अगर दोनों पक्षों के मध्य होता है तो दोनों को एग्रीमेंट को पढ़कर बिना किसी दबाव में प्रथम पक्ष व द्वितीय पक्ष दोनों की जगह पर हस्ताक्षर करने होते हैं
  5. एग्रीमेंट करते समय ₹500 का स्टांप ही वैध माना जाएगा पहले ₹100 के स्टांप पर भी एग्रीमेंट किया जाता था लेकिन आजकल स्टांप ड्यूटी एक्ट के अनुसार कोई भी एग्रीमेंट हो कम से कम ₹500 के स्टांप पेपर पर ही बनवाना चाहिए आजकल तो रेंट एग्रीमेंट भी ₹500 से कम के स्टाम्प वैध नहीं माना जाता है
  6. एग्रीमेंट करते समय दोनों पक्षकारों के हस्ताक्षर वह आईडी प्रूफ होना आवश्यक है एवं दो गवाह की आईडी और उनके हस्ताक्षर होना भी अति आवश्यक है
  7.  एग्रीमेंट करते समय एग्रीमेंट होने के पश्चात प्रथम पक्ष द्वितीय पक्ष द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद दो गवाहों के हस्ताक्षर करवाने होते हैं उसके पश्चात विद्युत द्वारा अधिकृत नोटरी पब्लिक के पास जाकर एग्रीमेंट को अटेस्टेड करवाना अति आवश्यक होता है।
  8. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए किसी के भी द्वारा एग्रीमेंट किया जाए तो इन बातों को पूर्ण रूप से ध्यान रखना होता है तब ही एग्रीमेंट वैध माना जाता है

एग्रीमेंट बनाते समय किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?

एग्रीमेंट बनाते समय जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है वह निम्न प्रकार से बताए गए हैं

  1. एग्रीमेंट बनाते समय दोनों पक्षकारों के आईडी प्रूफ ओरिजिनल व फोटो प्रति दोनों की आवश्यकता होती है
  2. एग्रीमेंट बनाते समय कम से कम ₹500 का स्टांप पेपर होना चाहिए ₹500 से कम का स्टाफ वैद्य नहीं माना जाता है इसलिए किसी भी प्रकार का एग्रीमेंट हो कम से कम ₹500 का स्टांप मान्य होगा।
  3. एग्रीमेंट बनाते समय दो गवाहों की आईडी प्रूफ ओरिजिनल में फोटो प्रति की आवश्यकता होती है
  4. एग्रीमेंट बनाते समय दोनों पक्षकारों को विधि के द्वारा अधिकृत नोटरी पब्लिक के समक्ष उपस्थित होकर दोनों को नोटरी पब्लिक के रजिस्टर में हस्ताक्षर करने होते हैं और नोटरी पब्लिक से एग्रीमेंट को अटेस्टेड कराना होता है
  5. एग्रीमेंट बनाते समय दोनों पक्षकारों के पासपोर्ट साइज रंगीन फोटोग्राफ होना अति आवश्यक है
  6. इस प्रकार एग्रीमेंट बनाते समय इन बातों का ध्यान में रखना अत्यधिक आवश्यक होता है जिनके द्वारा ही एग्रीमेंट को वैध करार दिया जाता है।

रजिस्टर्ड एग्रीमेंट क्या होता है?

एग्रीमेंट के बारे में हमने आपको पूर्ण रूप से बता दिया है क्या क्या दस्तावेज की आवश्यकता होती है किन-किन लोगों की आवश्यकता होती है एग्रीमेंट कैसे किया जाए क्यों किया जाए इन सब बातों के बारे में आपको हमने ऊपर बता दिया है अब हम देखेंगे कि रजिस्टर्ड एग्रीमेंट क्या होता है दोनों पक्षकारों के मध्य जब कोई लिखित करार कानूनी रूप से किया जाता है

और दोनों पक्षकारों की आपसी सहमति से पंजीकृत करवा लिया जाता है उसे रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कहा जाता है उसमें भी हमको गमों की आवश्यकता होती है और अगर अपना एग्रीमेंट या इकरारनामा पंजीकृत नहीं है तो उसे अवैध नहीं माना जा सकता है इस प्रकार हम आपको बता दिया है कि रजिस्टर्ड एग्रीमेंट क्या होता है वह एग्रीमेंट दोनों पक्षकारों की सहमति से ही पंजीकृत करवाया जाता है।

 

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एग्रीमेंट से किसी चीज पर मालिकाना हक नहीं मिलता है?

हम आपको बताने जा रहे हैं कि एग्रीमेंट से मालिकाना हक कब मिलता है और क्यों नहीं मिलता है एक नाम मात्र एग्रीमेंट होना ही किसी व्यक्ति के लिए उस प्रॉपर्टी का स्वामित्व होना नहीं माना जाता है हमने देखा है न्यायालय में अनेक प्रकार के सिविल मामले चलते हैं उनमें एविडेंस के रूप में कई प्रकार के एग्रीमेंट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं

और अपना अधिकार जताया जाता है। अगर आपने किसी व्यक्ति से कोई चीज करें कि है और दोनों पक्षकारों के मध्य इकरारनामा या गिरमिट हुआ है तो जब तक वह गाड़ी या कोई संपत्ति उस व्यक्ति के नाम नहीं हो जाती है जब तक वह उसका मालिक नहीं माना जाएगा नाम मात्र एग्रीमेंट के आधार पर वह मालिक नहीं माना जाता है

न्यायालय में भी कई बार कहा गया है सिर्फ एक एग्रीमेंट पर एग्रीमेंट के आधार पर किसी संपत्ति या किसी गाड़ी जो चीज क्रय की है उसकी टाइटल ओनरशिप नहीं मिलती है ना ही वह एग्रीमेंट के अनुसार मालिकाना हक जता सकता है साधन व समय हम आपको समझा सकते हैं कि एग्रीमेंट से या एग्रीमेंट होने से किसी व्यक्ति का मालिकाना हक नहीं माना जा सकता है

 

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