समन और वारन्ट क्या है 1 पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तो मेरा हमेशा से यही प्रयास रहा है कि मेरे द्वारा ज्यादा से ज्यादा आप लोगो के पास कानूनी जानकारी पहुँचती रहे। आजकल नये नये विधि की पढ़ाई करके विधार्थी न्ययालय मे काम करने के लिएआते है।

जिनको बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। न्ययालय में समन वारण्ट इन शब्दों का क्या इस्तेमाल होता है। जो कि नये नये विद्यार्थियों को समझने  में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अदालती कार्यवाही में अक्सर समन ओर वारण्ट का ज़िक्र किया जाता है। ये दोनों अलग अलग होते है। समन न्ययालय द्वारा किसी व्यक्ति को बुलावा पत्र भेजा जाता है किसी व्यक्ति को न्ययालय मे उपस्थित होने के लिए। और वारन्ट गिरफ्तारी पत्र होता है जो किसी अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए न्ययालय द्वारा भेजा जाता है।

समन फौजदारी और दीवानी दोनो मामलों में ही भेजे जाते है। और वारन्ट फौजदारी मामलो में है भेजे जाते है। अब आपको है ये पता होना चाहिए कि फौजदारी और दिवानी कौनसे मामले होते है। फौजदारी (criminal) और दीवानी (civil) अब हम  देखते है इनका विस्तार से वर्णण क्या हैं।

समन क्या है  

समन एक न्याय द्वारा भेजा गया बुलावा पत्र होता है।जो कि किसी व्यक्ति द्वारा न्ययालय में कोई केस दर्ज करवाया जाता है।तो  उसी केस मैं दूसरे पक्षकार को बुलाने के लिए एक बुलावा पत्र न्ययालय द्वारा जारी किया जाता है।उसे समान कहते है।

सिविल मामलो में समन की प्रक्रिया

समन क्या है होता है न्ययालय में इसकी क्या भूमिका है और न्ययालय द्वारा कैसे जारी किया जाता है। सिविल मामलो में न्ययालय मे किसी व्यक्ति द्वारा कोई केस दर्ज करवाया जाता है तो। उसे वादी कहते है।

और ओर उसी केस मे जिन व्यक्तियों को पक्षकार बनाया जाता है उन सभी को प्रतिवादी कहा जाता है। जब न्यायालय में वादी द्वारा कोई वाद या केस प्रस्तुत किया जाता है।तब न्यायालय द्वारा प्रतिवादी के समन जारी किए जाते है।

समन न्यायालय का एक मात्र बुलावा पत्र होता है। जो रजिस्टर्ड डाक द्वारा भी भेजा जा सकता है नही तो न्ययालय के द्वारा कर्मचारी द्वारा उसके निवास स्थान पर  तामील करवाया जाता है।

अब आप सोचोगे तामील क्या होता है वो हम विस्तार से नीचे तामील के बारे मे बताया गया है। इस पर न्ययालय द्वारा एक दिनांक अंकित की जाती है।उस दिनांक को न्ययालय के समक्ष उस व्यक्ति को हाज़िर होना पड़ता है।जिसको न्यायालय ने समन जारी किया हो। उस दिनांक को उस व्यक्ति द्वारा न्ययालय में हाज़िर ना होने पर अग्रिम कार्यवाही न्यायालय द्वारा की जाती है।

आपरिधिक मामलों मैं समन की प्रक्रिया

समन क्या होता है और न्ययालय मे  इसकी क्या भूमिका है न्ययालय द्वारा इसको कैसे जारी किया जाता है। सिविल मामलो की जैसे आपराधिक मामलों मे भी समन का बहुत महत्व है। जो भी किसी भी न्ययालय द्वारा अभियुक्त को या अपराधी को जारी किया जाता है।

इसपे  पे दिनांक अंकित की जाती है उस दिनांक को उस अभियुक्त को न्ययालय के समक्ष हाजिर होना पड़ता है ।यह  रजिस्टर्ड डाक द्वारा भी भेजा जा सकता है।और पुलिस द्वारा भी इत्तला दी जा सकती है।

अगर अंकित दिनांक को अभियुक्त न्ययालय के समक्ष हाज़िर नही हो सकता तो। न्ययालय द्वारा अभियुक्त का वारण्ट जारी कर दिया जाता है।

साक्षी के समन 

साक्षी का समन क्या होता है और यह कैसे जारी किए जाते हैं और इनका क्या संबंध होता है साक्ष्यों से साक्षी का समन का मतलब होता है जब कोई व्यक्ति द्वारा किसी घटना को होते हुए देखा जाता है  उसी मामले में पुलिस द्वारा बयान दर्ज किए जाते हैं उस व्यक्ति के जिसने घटना देखी हो और न्यायालय में पेश कर दी जाते हैं

  उसके बाद अगर न्यायालय को  उचित न्याय करने में उसी  गवाह है के अमुक बयानों की जरूरत होती है तो न्यायालय द्वारा समन जारी किये जाते हैं न्यायालय में सिर्फ और सिर्फ गवाह के लिए बुलाया जाता है जो उन्होंने घटनाक्रम में देखा है बस वही बयान लिए जाते हैं और कुछ उनसे नहीं पूछा जाता है इसे ही साक्षी का समन कहा जाता है

समन की तामील क्या होती है

नमस्कार दोस्तो हमने देखा है कि ऊपर समन का पूरा विस्तार से वर्णन किया है।उसमें तामील शब्द का एक बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है। तामील क्या होती है।जब को न्ययालय द्वारा किसी व्यक्ति या अभियुक्त का समन जारी किया जाता। है।

तो समन की जानकारी उस व्यक्ति को हो जाती है कि।मेरा समन न्ययालय से आया है।चाहे वो रजिस्टर्ड डाक से जाए या न्ययालय द्वारा किसी कर्मचारी के साथ भिजवाया गया हो समन व्यक्ति को मिलना ही या उसकी जानकारी हो जाना।इस  की तामील कहलाता है।

सक्षियों का समन पर न्यायालय में पेश ना होने पर कार्यवाही

 न्यायालय द्वारा जब साक्ष्यों को समन जारी किए जाते हैं उसके बावजूद भी न्यायालय में साक्षी अपने बयान दर्ज करवाने के लिए बार बार समन भेजे जाने पर भी पेश नहीं होते हैं या अपने बयान दर्ज नहीं करवाते हैं तो न्यायालय द्वारा साक्षी का वारंट जारी कर दिया जाता है 

वारंट क्या होता है

वारंट एक न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश होता हैकिसी पीठासीन अधिकारी या किसी सेशन जज या किसी मजिस्ट्रेट द्वारा वारंट  जारी किया जाता है वारंट का मतलब होता है वारंट न्यायालय द्वारा जारी करने के बाद पुलिस को उस अभियुक्त को गिरफ्तार करने या उसकी संपत्ति की तलाशी लेने का अधिकार मिल जाता है

पुलिस को  पुलिस को पूर्ण रूप से यह अधिकार होता है कि न्यायालय के आदेश की पालना करें और उस अभियुक्त को गिरफ्तार करके न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। वारंट पूर्ण रूप से लिखित  लिखित रूप से जारी किया जाता है

जिसके ऊपर जारी करने वाले के हस्ताक्षर मोहर और किस न्यायालय द्वारा जारी किया गया है यह पूर्ण रूप से लिखा होता है और किस अपराध के अंतर्गत यह वारंट अभियुक्त को पकड़ने के लिए जारी किया हुआ है  यह उस वारंट पर लिखित रूप से लिखा हुआ होता है उसे ही वारंट कहते हैं

 

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 वारंट और समन में अंतर

वारंट क्या होता है संबंध क्या होता है यह हमने ऊपर पूर्ण रूप से वर्णन कर दिया गया है अब हम देखते हैं इन दोनों के बीच में अंतर क्या होता है वारंट और समन के बीच में क्या अंतर है  समन एक न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति को या प्रतिवादी को जारी किया हुआ बुलावा पत्र होता है

जिसमें उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता यह सिर्फ एक मात्र बुलावा पथरी होता है। समन  संबंध साक्ष्य पक्षियों को बुलाने के लिए भी भेजा जाता है जो बुलावा पत्र होता है जिनको न्यायालय के अंदर बयान देने के लिए एक बुलावा पत्र भेजा जाता है

जिसमें व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता बस एक सूचना के आधार पर उसको सूचना दी जाती है कि आपको न्ययालय में पेश होने की दिनांक यह है उस दिनांक तक न्यायालय में उस व्यक्ति को पेश होना होता है।

वारण्ट  वारंट के अंतर्गत न्यायालय का एक वह देश होता है जो कि किसी सेशन जज या मजिस्ट्रेट या किसी पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है जो एक गिरफ्तारी पत्र होता है जिसमें पुलिस को आदेश दिया जाता है

कि उस अभियुक्त को पकड़ कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए वारंट में अभियुक्त का गिरफ्तारी होती है। उस व्यक्ति ने जो अपराध किया है उसके लिए वारंट जारी किया जाता है वारंट लिखित प्रारूप होता है जिसमें अपराध का भी वर्णन होता है कि

किस अपराध में यह वारंट जारी हुआ है और जारी करने वाले न्यायालय या पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर से यह जारी होता है न्यायालय की इस मोहर लगी रहती है जिससे यह पता होता है कि यह वारंट जारी किसने लेने की है इस प्रकार समन और वारंट में बहुत अंतर होता है जो हमने आपके सामने वर्णन कर दिया है

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