SECTION 307 IPC IN HINDI इससे बचने के उपाय पूरी जानकारी

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2 आईपीसी की धारा 307 का विवरण Description of section 307

आईपीसी की धारा 307 क्या है What is section 307 of IPC

 नमस्कार दोस्तों

आज हम अपने ब्लॉग में एक महत्वपूर्ण धारा का पूर्ण रूप से वर्णन करने जा रहे हैं भारतीय दंड संहिता की धारा 307 क्या है यह कब लगती है उसमें दंड के प्रावधान क्या है इससे बचने के लिए क्या किया जाए इत्यादि सभी का वर्णन हम इस ब्लॉग में करने वाले हैं

अगर हम IPC की बात करें तो यह भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिश पर 1833 के चार्टर एक्ट के तहत IPC भारतीय दंड संहिता (आई.पी.सी.) 1860 में अस्तित्व में आया  आईपीसी को भारतीय दण्ड संहिता भी कहा जाता है

IPC  full Form  Indian Penal Code

आजकल अपराध होना एक आम बात हो गई है कोई नई बात नहीं है कि अपराध हो या घटना हो यह समाज में एक बुराई है समाज में या मरे देश में कुछ ऐसे भी आसान असामाजिक तत्व होते हैं जो इन अपराधों को अंजाम देते हैं आज हम धारा 307 के बारे में आपको विस्तार से वर्णन करेंगे। चलो आओ हम देखते हैं इसका पूर्ण रूप से विवरण क्या है और इससे कैसे बचा जाए।

आईपीसी की धारा 307 का विवरण Description of section 307

 धारा 307 आईपीसी के अनुसार कोई व्यक्ति जो एक ही आशय से या इरादे से किसी अन्य व्यक्ति को विभिन्न परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है जिससे अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचती हो या उसकी मौत का कारण बन जाए तो वह व्यक्ति हत्या का दोषी होगा धारा 307 के अंतर्गत वह व्यक्ति हत्या का दोषी होगा जिसका कारावास 10 वर्षों तक हो सकेगा या

और भी बढ़ाया जा सकता है एवं आर्थिक दंड का भी वह उत्तरदाई होगा अथवा दोनों का कारावास व आर्थिक दंड का उत्तरदायित्व उसी का होगा।।ये धारा काफी प्रचलित धारा है।जो अधिकतर लोगों को इसके बारे मे पता नही होता है।

धारा 307 मे लागू अपराध offense under section 307

धारा 307 आई पी सी मे क्या अपराध है।इसको करने वाले को कितनी सजा का प्रावधान है। 

1हत्या करने का प्रयत्न

 10 वर्ष का कारावास व आर्थिक दण्ड अथवा दोनो

अपराध-गैर जमानती

किसी भी सेशन न्यायधीश द्वारा विचारनीय।

2 यदि किसी अपराध से किसी व्यक्ति को चोट या नुकसान पहुँचता है तो

10 वर्ष का कारावास व आर्थिक दण्ड अथवा दोनो

अपराध-गैर जमानती

किसी भी सेशन न्यायधीश द्वारा विचारनीय।

3 आजीवन कारावास के अपराधी द्वारा हत्या का प्रयास

म्रत्यु दण्ड या 10 वर्ष का कारावास व आर्थिक दण्ड अथवा दोनो

अपराध-गैर जमानती

किसी भी सेशन न्यायधीश द्वारा विचारनीय।

ये ऐसे मामले होते है जो समझौता करने लायक नही होते है।

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धारा 307 मे हत्या का प्रत्यन करने के लिए दण्ड Punishment for attempt to murder under section 307

हमारे समाज मे अपराध होना एक आम बात हो गई है।ये धारा भी बहुत लोगो से अपने सुनी होगी।अखबार में न्यूज हम देखते है कि  काफी प्रचलित धारा है ये।भारतीय दंड संहिता की धारा 307 में किसी की हत्या करने का प्रयास करने के लिए दण्ड का प्रावधान दिया हुआ है।बहुत से लोगो को तो इसकी जानकारी भी नही होती कि ये धारा कोनसी है।इसके क्या सजा के प्रावधान है 

भारतीय दंड संहिता की इस धारा 307 में किसी व्यक्ति  द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास करना वह इसी धारा के अंतर्गत आता है एवं इसमें धारा 307 में हत्या करने के प्रयास के लिए दंड के प्रावधान दिए गए हैं

 यह  धारा सिर्फ किसी की  हत्या के प्रयास के लिए ही बनाई गई है धारा 307  मैं सजा के प्रावधान सिर्फ उसी के लिए हैं जिसने किसी व्यक्ति का हत्या करने का प्रयत्न किया हो ना की हत्या के लिये ये सिर्फ हत्या करने का प्रत्यन करने वाले पर है लागू होगी।हत्या करने पर आई पी सी की धारा 302 304 लागू होगी।

किसी व्यक्ति को आसान भाषा मे ये समझना चाहिएधारा 307 में प्रावधान ये है कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी पर धारदार हतियार से हमला करना या किसी व्यक्ति को चोट पहुँचना ।लेकिन जिस व्यक्ति पर हमला किया है।उस व्यक्ति की हत्या नही हुई हो।तो मामला आई पी सी की धारा 307 के अंतर्गत की दायर होगा।इस प्रकार इसको सरल भाषा मे आप समझ सकते हो।

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धारा 307 मे दण्ड के प्रावधान Punishment provisions in section 307

 धारा 307 में दंड के प्रावधान कुछ इस प्रकार दिए हुए हैं धारा 307 में हत्या करने के प्रथम के आधार पर मुकदमा चलाया जाता है और इसमें दंड के प्रावधान बहुत कठोर है कठोर कारावास भी है आर्थिक दंड भी है आजीवन कारावास भी है इस प्रकार कुछ दंड के प्रावधान बताए गए हैं

जैसे क्यों धर्म के लिए आप समझे किसी व्यक्ति ने किसी व्यक्ति को मारने के मंशा से या उसकी हत्या करने की मंशा से वार किया हो यह हमला किया हो लेकिन वह व्यक्ति बच गया हो तो न्यायालय द्वारा ट्रायल में हत्या का प्रयास करने वाले यह हमला करने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष का कारावास की सजा सुना सकती है 

अगर उस व्यक्ति को गंभीर चोट लगती है तो सजा में तब्दीली भी हो सकती है सजा को उम्र कैद भी किया जा सकता है एवं सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड का भी प्रावधान है जोकि अपराधी की या अभियुक्त की हैसियत के अनुसार न्यायालय द्वारा जुर्माने से दंडित किया जाता है

भारतीय दंड संहिता की धारा 307 साथ में प्रावधानों के बाद कुछ नये  तथ्य भी जोड़े गए हैं जिसमें  अगर कोई ऐसा व्यक्ति किसी की हत्या करने का प्रयत्न करता है जोकि खुद किसी दूसरे अपराध में आजीवन कारावास की सजा में हो उस व्यक्ति के इस धारा के अंतर्गत मृत्यु दंड का भी प्रावधान है

 किसी व्यक्ति द्वारा किसी पर हमला किया जाता है अगर उसको गंभीर चोट आती है लेकिन हमला करने वाले का ऐसे उसको हत्या करने का यह गंभीर चोट पहुंचाने का नहीं था तो मामला धारा 307 के अंतर्गत की जगह धारा 325 के भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दायर होगा  और उसी के अनुसार सजा के प्रावधान होंगे न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जाएगी।

आईपीसी की धारा 307  न्यायालय की प्रक्रिया Court Procedure of Section 307 IPC

धारा 307 की न्यायालय के अंतर्गत पुलिस शिकायत  के साथ  शुरू हो जाती है आइए दखते है न्यायालयमे किस प्रकार ट्रायल प्रक्रिया है |

प्रथम सूचना रिपोर्ट?

धारा 307 आईपीसी के अंतर्गत ट्रेन चलने का सबसे महत्वपूर्ण कदम या सर्वप्रथम कदम पुलिस की शिकायत दर्ज होना ही है जिसे हम एफआईआर  भी बोल सकते हैं यानी की धारा 154 सीआरपीसी के अंतर्गत पुलिस द्वारा एफ आई आर दर्ज कर ली जाती है और यही सही मामले की शुरुआत होती है।

अनुसंधान अधिकारी द्वारा मामले का अनुसंधान करना?

जब प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्द हो जाती है उसके पश्चात अनुसंधान अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जाती है मामले में सबूत जुटाए जाते हैं और और अनुसंधान मैं जिस की भी आवश्यकता होती है वह सबूत संग्रह करके अनुसंधान अधिकारी द्वारा जांच को पूरा किया जाता है।

चार्जशीट न्यायालय के समक्ष पेश होना?

पुलिस अधिकारी द्वारा जो भी मामले का अनुसंधान अधिकारी होता है उसके द्वारा मामले की पूरी तरह जांच करने के पश्चात न्यायालय के समक्ष मामले में चालान पेश करना होता है यानी चार्जशीट फाइल करनी होती है।

चार्ज बहस?

अनुसंधान अधिकारी द्वारा अनुसंधान पूर्ण रूप से करने के पश्चात न्यायालय के अंदर चार्जशीट पेश करने के पश्चात न्यायालय द्वारा अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता द्वारा चार्ज बहस की जाती है मेरे द्वारा अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा तर्कों को सुना जाता है और चार्ज फ्रेम किया जाता है 

अभियोजन पक्ष द्वारा गवाह पेश करना?

अभियोजन पक्ष द्वारा गवाह पेश करना होते हैं 42 एस के पश्चात पत्रावली एविडेंस के स्टेज पर आ जाती है और अभियोजन पक्ष द्वारा गवाह को पेश करना होता है और न्यायालय द्वारा भी गवाहों को समन जारी किए जाते हैं जिसमें गवाह सूची में जिन व्यक्तियों के नाम होते हैं उनको समन द्वारा भी बुलाया जाता है।

अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा गवाहों से जिरह करना?

अभियोजन पक्ष द्वारा गवाह पेश करने के पश्चात अभियुक्त के वकील या अधिवक्ता द्वारा गवाहों से जी रहे करी जाती है यानी दवाओं का परीक्षण किया जाता है और गवाहों से अभियुक्त के वकील द्वारा सवाल पूछे जाते हैं जो कि उस मामले से संबंधित होते हैं।

 साक्ष्य सफाई?

साक्ष्य सफाई से तात्पर्य है कि अभियुक्त द्वारा अपने बचाव संबंधित दस्तावेज या साक्ष्य पेश करने होते हैं अगर अभियुक्त के पास कोई साक्ष्य है तो न्यायालय में फ्रेश करने होते हैं जिसे डिफेंस एविडेंस भी कहा जाता है

बयान मुलजिम?

बयान मुलजिम से तात्पर्य है कि साक्षी सफाई के पश्चात अभियुक्त के बयान लिए जाते हैं अभी द्वारा मामले के संबंध में बयान लिए जाते हैं न्यायालय के समक्ष उपरोक्त अभियुक्त द्वारा अपने बयान दिए जाते हैं अब इस मामले से संबंधित जो भी अभियुक्त बोलना चाहता है उच्च न्यायालय द्वारा सुना जाता है।

बहस अंतिम?

अंत में इस मामले में न्यायालय द्वारा बहस अंतिम सुनी जाती है दोनों पक्षों को न्यायालय द्वारा सुना जाता है अभियोजन पक्ष द्वारा और अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा दोनों को न्यायालय द्वारा सुना जाता है मौखिक रूप से दोनों अपना-अपना पक्ष रखते हैं और न्यायालय द्वारा इस अंतिम बहस सुनने के पश्चात निर्णय दिया जाता है।

न्यायालय द्वारा निर्णय?

अंत में दोनों पक्षकारों को पूर्ण रूप से सुनने के पश्चात न्यायालय द्वारा मामले पर गवाहों और सबूतों को मध्य नजर रखते हुए न्यायालय द्वारा निर्णय दिया जाता है दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात और गवाहों को सुनने के पश्चात न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय दिया जाता है।

 अभियुक्त को सजा?

न्यायालय द्वारा अगर अभियुक्त को दोषी ठहराया जाता है। अगर न्यायालय द्वारा अभियुक्त को दोषी ठहराया गया है तो दोषी होने पर निर्णय लेने के लिए एक सुनवाई और की जाती है।

 उच्च न्यायालय में अपील?

अगर निचली अदालत द्वारा अभियुक्त को दोषी करार दिया जाता है तो अभियुक्त के पास उच्च न्यायालय जाने का अधिकार होता है यानी कि उच्च न्यायालय में वह उस आदेश को लेकर चैलेंज कर सकता है जो कि निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराया है उच्च न्यायालय के पश्चात हुई सर्वोच्च न्यायालय में भी वह जा सकता है यह व्यक्ति के पास हुई अपील करने के अधिकार होते हैं।

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धारा 307 मे जमानत के प्रावधान Provision of bail in section 307

 धारा 307 में क्या क्या प्रावधान है जमानत कैसे ली जा सकती है  यह एक  गैर जमानती अपराध है इसके अंदर  जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है यह एक गंभीर प्रवृत्ति का अपराध है धारा 307 के अंतर्गत हत्या के  के लिए सजा का प्रावधान है

जिसमें पुलिस थाने द्वारा कोई जमानत का प्रावधान नहीं है यह एक गैर जमानती अपराध है । इसकी जमानत याचिका जिला न्यायालय में प्रथम बार लगाई जाती है अगर जिला न्यायालय द्वारा अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी जाती है

तो उसके प्रदेश के उच्च न्यायालय में जमानत याचिका पेश की जाती है।वेसे तो ज़मानत मिलना मुश्किल होता है लेकिन उच्च न्यायलय को अगर ऐसा लगता है कि अपराध इस व्यक्ति ने नही किया अगर ऐसा प्रतित होता है तो जमानत मिलने के आसार ज्यादा हो जाते है। उच्च न्यायालय को को ऐसी की आपात स्थिति लगती है या लगता है कि ये गम्भीर अपराध इसने नही किया तो उच्च न्ययालय द्वारा जमानत याचिका मंज़ूर कर ली जाती है।

धारा 307 के अंतर्गत न्ययालय द्वारा अग्रिम जमानत लेने का प्रावधान नही है।लेकिन अगर न्ययालय में अभियुक्त द्वारा वकील के माध्यम से न्ययालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी जाती है तो उसकी याचिका तुरन्त प्रभाव से खारिज कर दी जाती है।चाहें वह किसी भी न्ययालय में अपनी अग्रीम जमानत याचिका दायर करे जिला न्यायालय हो चाहे उच्च न्यायालय हो।

आईपीसी की धारा 307 मे केसे बचा जा सकता है

धारा 307 मे बचने की बहुत काम आशा होती है यह कोई समझोत करने योग्य अपराध नहीं है हलाकी माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी यह माना है की यह अपराध समझोंता करने लायक नहीं है इसमे अगर परिवादी यानि जिसने प्रथम सूचना रिपोर्ट (fir ) दर्ज कारवाई है उसने अगर कही न कही अपने बयानों मे न्यायालय के समक्ष हास्टाइल हो जाता है

यानि बयान कुछ आपके पक्ष मे दे दिए जाते है तो अभियुक्त के बचने की कुछ आशा की किरण जाग उठती  है एसे मे या शिकायत करता अगर न्यायालय के समक्ष बयान दे की मुझे इस मुकदमे मे आगे कोई कार्यवाही नहीं करनी है तब कुछ अभियुक्त के मुकदमे से बारी होने की आशा होती है |ओर इसमे एसे ही बच सकते है क्योंकि ये यक गंभीर प्रवती का अपराध है यह कोई समझोंता करने योग्य अपराध नहीं है |

आईपीसी की धारा 307 में वकील की जरूरत क्यों होती है।

 भारतीय दंड संहिता की धारा 307 मैं दंड के प्रावधान कठोर है मुझे एक गैर जमानती अपराध है इसमें जमानत मिलना भी मुश्किल है इसमें अभियुक्त को 10 वर्षों का कारावास वह आर्थिक दंड अथवा दोनों तक की सजा सुनाई जा सकती है

अगर अपराध गंभीर प्रवृत्ति का किया हो यह किसी को गंभीर चोट पहुंची हो इस प्रकार के मामले में आजीवन कारावास का भी प्रावधान है ऐसी स्थिति में अभियुक्त का निर्दोष बचकर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है अपने आप को सही साबित करना बहुत कठिन कार्य हो जाता है

ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक निपुण वकील या अधिवक्ता जो अपराधिक मामलों में सर्वश्रेष्ठ अधिवक्ता हो या पारंगत हो जिन्होंने अपराधिक मामलों में कई प्रकार के ऐसे मामले लड़े हो या सुलझाएं हो ऐसे वकील को आपके द्वारा नियुक्त करना आपके लिए बहुत लाभदायक होगा जोकि आपको सजा से भी मुक्ति दिलवा सकता है।

और आपको निर्दोष साबित कर सकता है न्यायालय द्वारा आपको बरी भी करवा सकता है इस प्रकार का वकील आप को ही नियुक्त करना होता है जो आपके आरोप मुक्त होने के अवसर बहुत बड़ा देता है और आपको इस मामले से बरी करवा देता है

Mylegaladvice ब्लॉग पर आने के लिए यहाँ पे ब्लॉग पढ़ने के लिए मैं आपका तह दिल से अभारी रहूंगा और आप सभी साथीयो दोस्तो का मैं बहुत बहुत धन्यवाद करता हु इस ब्लॉग के संबंध मे आपका कोई ही सवाल है जिसका जवाब जानने के आप इछुक है तो आप कमेंट बॉक्स मैं मूझसे पुछ सकते है।।

90 thoughts on “SECTION 307 IPC IN HINDI इससे बचने के उपाय पूरी जानकारी”

          • अगर किसी व्यक्ति को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई है और वह बेल पर बाहर आ गया है और सारा समय बाहर बीत गया है विपरीत पार्टी द्वारा कोई पैरवी नही किया गया हो तो क्या उसे जेल होगी या नहीं

      • Sir…… Mere bhai pe jhutha case kiya h sb… Koi v sabut nhi h fir v judge bail nhi de rha h iska kya reason ho skta h… Aap bta skte h ??? Plzz Sir

        Reply
    • Sir mera bike thana me japat hai us par mukadama dhara 143 149 323 325 332 333 307 353 283 504 506 188 lagta gya hai jisme ham nirdosh hai ham us ghatana me nahi the mera bike mera jija lekar gaya tha fir me gari number likha hai mera naam.nahi hai

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    • अगर 307 लगे बेकसूर पर तो उसके सबूत आपके पास होने चाइए |सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप हमारे संपर्क सूत्र द्वारा हुमसे संपर्क कर सकते है

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      • झूठ t360 की रिपोर्ट पर मजिस्ट्रेट द्वारा 190 में संज्ञान लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है इससे कैसे बचा जा सकता है व्यक्ति इंक्वायरी में हमारे पास निर्दोष होने के पूरे सबूत है पुलिस ने इंक्वायरी में उन्हें बाहर कर दिया है

        Reply
      • अपराध में मेरा नाम गलत देकर फँसाया गया है , मैं घटना स्थल पर था ही नहीं जो स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे से प्रमाणित हो सकता है , सीसीटीवी ही सबूत है घटना दिन 9 बजे घटी है धारा 307 मुख्य है , बेल कैसे ले ं

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      • Dear sir muzpe 307 hui hai
        Jhuti case hui hai jisko maine mara hai wo aaj 3 din me gharpe chalke aya hai
        Aur case 307 hui hai gawah uske ma bap khud hai
        Mai arest nahi hua hu abhi tak

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  1. सर जी 307 केस में पुलिस ने बन्दुक बरामद नही की ओर गोली मारने वाले से पैसे खा कर उसके बयान मै लिखा है की उसने गोली नही मारी उसको झूठा फसाया गया है तो क्या अब उस अपराधी को सजा नही होगी
    सर लेकिन मेरा केस अभी सुरु नही हुआ है केस डायरी ओर चार्जशीट कोर्ट मै दाखिल हो चुकी है
    Pls reply me sir ????????????

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  2. सर जी मेरे ऊपर धारा 307 में मुकदमा दर्ज हुआ जिसमें पिस्टल का खोखा बरामद है और कुछ बरामद नहीं है और जो दूसरा पक्ष हे उससे हमारा फैसला हो चुका है सर पुलिस नही मान रही है कोर्ट में केस जाने वाला हे इसमें बचाव कैसे हो सकता हैं।
    और ना ही किसी को गोली लगी ना ही कोई सबूत और ना ही कोई डॉक्टरी रिपोर्ट एक खरोच भी नही हे किसी को

    Reply
    • सर जी 307 केस में पुलिस ने बन्दुक बरामद नही की ओर गोली मारने वाले से पैसे खा कर उसके बयान मै लिखा है की उसने गोली नही मारी उसको झूठा फसाया गया है तो क्या अब उस अपराधी को सजा नही होगी
      सर लेकिन मेरा केस अभी सुरु नही हुआ है केस डायरी ओर चार्जशीट कोर्ट मै दाखिल हो चुकी है
      Pls reply me sir ????????????
      Aapki mail Id sahi nhi hai

      Reply
  3. sir kya 307 me high cort me samjhota ho sakta hai , aur sesan Cort se 1 saal ki saja hui thi aur anya bari huye the, ab ripot karta rajinama karane ke liye teyar hai

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    • धारा 307 का अपराध समझोंता करने योग्य अपराध नहीं है ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारी मेल आईडी पे संपर्क करो हमारे द्वारा आपसे जल्दी ही संपर्क किया जायगा|

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  4. Sir mana ki apne bcco ko bhut se log mil kr mar rhe ho or papa sat ho papa y sb dekh kr htiya r utha le or bhid m kisi ek ko cot lag jaye mamla court m phuchta hai to jamanat ho jati h fir bi wapas case lga diya jata hai ki 307 dhara lga di gyi ki half murder kiya or hume pta h ki jisko cot lgi wo bhut hlki cot hai to hume kya krna cahiy ki dubara jmanat mil jaye

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  5. Sir, mere Bhai ko wo do baar aatack kiya jisme dono baar sr fat gya Jada hath Tor diya or bhut pita chasma Tora phone Tora . Bt hmlog case nhi kiye lekin 1 month ke baad Mera bhai USko pit diya or wo sb case kr diya jisme 307 lga hai unsb ka jaan pachan hai to jaan bujh ke or natak kr ke case kr diya Mera bhai log Upsc ka tayari krta hai self study kr ke ye Sb kaise solve hoga plz help me sir.

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  6. Sir meri wife ne jhuta kesh kiya hai jisme usne 498a,323,504,506,307, dhara lagi hai mere pas letter aaya hai sulha kendra se mene apni apni wife se bat ki to boli me sulha krna chahti hu to sir sulha kendra me samjote se sulha hone ke bad ye sari dhara apne aap hat jayegi ya nhi plz. Help me

    Reply
  7. सर मै अनु.जाति का सदस्य हु .कुछ दबंगों द्वारा मेरे दरवाजे़ पर आकर बेवज़ह मारपिट किए जिसमे घर के महिला पुरूष दोनो को गंभीर रुप से घायल कर दिया गया है12,13 सर मे टाके पडे है .जिला मजिस्टेट से बेल भी दीया जा चुका है और अब वह केस सुलह करने की धमकी दे क करने की धमकी दे रहा है मै क्या करू कुछ बताए

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  8. Sir mera naam md alam hai
    Abhi 10 din pahle mere gaon me patang ko lekar jhagda hua tha jisme aik ko chot lagi un logo he case kr diya 307 lagwa diya .uska vidio bhi hai ye maloom nhi pad raha hai ki kisne maara .30 log hai video me 4 logo pr case laga ab kya karein

    Reply
  9. Sir agar hamara sach 307 h real chot kintu other paksh jhootha chhed chhad kesh dark jo ki gav k kuch logo k support se aur hamara gavah suddenly unke hi paksh m ho jae to is gambhir istathi m kya kare ki une saja ho sake

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  10. मेरे साथ कुछ दिन पहले एक घटी जिसमें मेरे सिर पर फरसा से मारा गया जिससे मेरा सिर फट गया और मेरे जख्म प्रतिवेदन में डा० के द्वारा गहराई कम कर दिया गया है FIR में 307 लगा है जख्म प्रतिवेदन में कैसे सुधार कराया जाए

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  11. Sir mere husband ko 307 k case me fasaya Gaya h police ne apne pass se gun rakhkar photo le Lia h aur under upper pahle se bhi case chal rha h unko bell mil jayegi

    Reply
  12. Sir mere jamin vivad me ladai huya hai jiske opposition party ke sir me chhot aur panja ka anguli tut gaya hai usne sab per 307 laga diya hai to isme bail kaise milega
    ….plz suggest me

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  13. Sir mere pariwar ke upar 307 lga he
    Jisme hamari jamanat ho chuki he or samne wale se mamjhota bhi ho chuka he gawaha bhi apane paksh me gawai dene ke liye tyar he or fariyadi bhi to kya hm bari ho jayenge

    Reply
  14. Sir mere bhai pe unki wife 498a,379,307,149,506,3/4 case
    16/9/21 me karr di aur hum sab bhiyake alwaa sabhi family cjm court me snah darj kiye hai 2019 me kya hum sabhi family ko police arrest karegi

    Reply
  15. Mujhe 307 me 10 saal ki saza ho rakhi hai high court me appeal ke bad bail par hu jo party hai wo chacha hai jinse property se sambandhit hai jiske case is marpit se pehle se civil court me chal rhe the or aaj bhi chal rhe hai to aaj hum log feshla karna chahe to kya High court me ab feshla ho sakta hai kya…? Or ho sakta hai to kaise or kis saction me

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  16. Help me sir
    Mere papa ko 307 me jhooth muth ka fasa diya hai

    To ham kese apna papa ko jel se riha karwane

    Mb. No. 9304105540

    Reply
  17. SIR MERE BHAI BHABHI ME JHAGDA HUA NASTE KO LEKAR OR MERI BHABHI NE MERI BUDI MAA KO MARA CHAPPAL SE STOOL SE OR IS PR MERE BHAI NE USSE KHA KI AISA KYU KIYA TO USNE BHAI KO B THAPPAR MARA PHR BHAI KO GUSSA AGYA USNE BHI THAPPAR MAR DIYA IS PAR BHABHI ME 100 NO DIAL KR DIYA OR APNE BHAIYAON (2) KO CALL KRDIYA. PCR AAI BO SAMJHA KAR CHALI GAI PAR JAB BHABHI K BHAI AYE UNHONE AATE HI GALI GALOUCH MAR PEET SURU KAR DI MAA K SATH BHI OR BHAI K SATH BHI OR BHABHI B UNK SATH SURU HOGAI MERI MAA KO DHAKKA DE DIYA JISSE BO GIR GAI JAMEEN PR OR TENO LOG MERE BHAI PR LIPAT GAYE KNIEF SE MARNE KI DHAMKI DI MERE BHAI KO AISA PHLE B KAI BAR KIYA HAI UNLOGO NE IS PR CHENA JHAPTI ME DHOKHE SE KNIEF BHABHI K BHAI KO LGGYA PET ME IS PAR
    USNE MERE BHAI PAR IPC 307 LGWA DI AB KYA SOLUTION HO SKTA HAI MUJHE APN BHAI KO BAHAR NIKALNE K LIYE PLS SUGGEST.

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  18. Sir mere upar dusare parte 307 ya 308 lagbana chahate he or doctor se bhi juti medical report banva Lai hai paise dekar me kya karu bataye please

    Reply
  19. आज से करीब दो दिन पहले मेरे पापा पर एक धारदार हथियार से अटैक किया गया जिस से दोनो हाथो की कलाई पुरी कट गई और दूसरा वॉर गर्दन पे किया जो गर्दन पे ना लग कर आंख के नीचे लगा और वहां २४ टाका पड़ा। अभि मेरे पापा जिंदगी और मौत के बीच जुझ रहे है ! मैने केस एफ आई आर कर दिया है और आरोपी पकड़ा जा चुका है और आरोपी का हथियार भी पकड़ा जा चुका है धारा ३०७ पुलिस द्वारा लगाया गया है ! कुछ लोग उसके बैल कराने की कोशिश कर रहे है क्या आरोपी का बेल हो सकता है के सर प्लीज मुझे बताइए!
    कॉन्टैक्ट नंबर : 9546299996

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  20. Sir, plz help me . Ek dusman par 307 lgi h ,or use high court se jamant mil gai h . Or vo abhi bhi gali-galoch karta h. To sir use saja hogi ya nhi ? Sir I am very poor student .plz reply sir. My con. 9509940875

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  21. दोनो पक्षो में मारपीट हूई हो औऱ चोट सिर्फ एक पक्ष के ज्यादा आयी हो तो धारा 307 में बाहर से जमानत लेनी हो तो केैसे लगे । औऱ हाई कोर्ट में केैसे बैल डालेगे ।

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  22. Sir mere wife ne fasce khane ki kosish ki or ma ghar par nahi tha or jab vo fasce laga rahi thi to mujhe video call ki or mane record kar le
    Par fir bhi mere or mere ghar walo par case kar diya police ko video dikhai par hamare nahi sune or vo advocate hai or ghava bhi hai jin logo ne bachaya tha police ko baataya par fir bhi hamar nahi sune ab hum kaise bacha sakte hai 307 lagva de

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