इस्तगासा क्या होता है इसे को दायर कर सकता है? 1 पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तो

आज हम बात करने जा रहे हैं एक महत्वपूर्ण शब्द की या महत्वपूर्ण जानकारी भी आप उसे बोल सकते हैं इस्तगासा यह शब्द बहुत कम लोगों ने सुना होगा यह उर्दू का शब्द है। इस जगह से का न्यायालय के नजरिए से यह तात्पर्य होता है की इस्तगासा एक वह परिवाद है जो किसी अपराधिक मुकदमा चलाने के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है।

इससे इस्तगासा कहा जाता है। इस्तगासा कब दायर किया जाता है। न्यायालय के समक्ष न्याय की गुहार लगाते हुए किसी भी व्यक्ति द्वारा इस्तगासा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। ईदगाह से को परिवाद भी कहा जा सकता है इस प्रकाशक क्या है कौन कर सकता है इसके बारे में विस्तार से वर्णन हम करेंगे।

इस्तगासा क्या होता है?

इस्तगासा क्या होता है इस्तगासा से  तात्पर्य यह होता है इसका साधारण भाषा में हम अर्थ यह समझ पाते हैं की किसी व्यक्ति द्वारा अपराधिक मुकदमा चलाने के लिए किसी न्यायालय के समक्ष परिवाद या प्रार्थना पत्र पेश किया हो उसे इस्तगासा कहा जाता है। इस्तगासा अमूमन करने की व्यक्ति को जब जरूरत पड़ती है

जब किसी अपराधिक रिपोर्ट के लिए व्यक्ति द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है उसके बाद उस व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष न्यायालय में इस्तगासा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करता है। मेले में इस्तगासा दायर करने के पश्चात न्यायालय द्वारा आदेश दे दी जाते हैं और पुलिस द्वारा मामला दर्ज 156( 3) सीआरपीसी में जांच के आदेश फरमा दिए जाते हैं और पुलिस द्वारा अनुसंधान जारी कर दिया जाता है।

उदाहरण के रूप में भी आपको हम समझा सकते हैं किस तरह सा किस प्रकार किया जा सकता है और आगे हम इसकी प्रक्रिया का भी वर्णन पूर्ण रूप से करेंगे।

उदहारण=

किसी सुनसान इलाके में संगठित अवस्था में मिले किसी व्यक्ति के शव के मामले में उसके परिवार जनों ने हत्या की आशंका जताई और संबंधित न्यायालय में इस्तगासा दायर किया न्यायालय ने दायर इस तरह से पर आदेश 156 3 का फरमा दिया और संबंधित पुलिस ने अपहरण व हत्या का मामला दर्ज कर लिया और पुलिस द्वारा अनुसंधान जारी कर दिया गया इस प्रकार हम इस उदाहरण से यह समझेंगे कि इस्तगासा किस प्रकार किया जाता है।

उदारहण=

इस प्रकार दूसरा उदाहरण में हम आप को समझाते हैं कि दो गुटों में आपस में अगर विवाद हो जाता है चाहे वह भूमिका हो चाहे मकान का हो चाहे बंटवारे का हो चाहे कृषि भूमि का किसी भी प्रकार का कोई भी विवाद दो पक्षों के बीच में जब उत्पन्न हो जाता है तो दोनों पक्ष में मारपीट हो जाती है और दोनों पक्ष के व्यक्तियों को गंभीर चोट पहुंचती है

उसके पश्चात अगर पीड़ित पक्ष की पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है तो उसके पश्चात पीड़ित पक्ष कार द्वारा न्यायालय के समक्ष या मजिस्ट्रेट के समक्ष न्याय की गुहार लगानी पड़ती है और इस्तगासा न्यायालय में प्रस्तुत करना पड़ता है उसके पश्चात न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर दिया जाता है और पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर लिया जाता है और अनुसंधान जारी कर दिया जाता है इस प्रकार हम इस्तगासा करवा सकते हैं।

इस्तगासा कोन कर सकता है?

इस्तगासा किसके द्वारा किया जा सकता है यह हम आपको बताएंगे इस्तगासा यानी न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना या परिवाद पेश करना भी कहा जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति पीड़ित है और रहे पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने जाता उसके पश्चात भी अगर उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है तो उस व्यक्ति द्वारा न्यायालय के समक्ष इस्तगासा दायर कर सकता है

और न्यायालय द्वारा आदेश इस तरह से पर कर दिया जाता है और पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर लिया जाता है उसके पश्चात पुलिस द्वारा अनुसंधान जारी कर दिया जाता है इस प्रकार कोई भी व्यक्ति अगर पीड़ित हो और न्याय नहीं मिल रहा हो तो वह न्यायालय के समक्ष जाकर इस्तगासा दायर कर सकता है और न्याय की गुहार लगा सकता है इस प्रकार आप देखेंगे कि इस तरह से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया क्या होती है।

 

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इस्तगासा दायर करने की प्रक्रिया क्या है?

इस्तगासा दायर करने की क्या प्रक्रिया है किस प्रकार हम इस्तगासा दायर कर सकते हैं किन-किन बातों का इस्तगासा ध्यान में रखते हुए हमें इस्तगासा पेश करना है इन सब बातों की विस्तार से हम आपको समझाएंगे और बताएंगे की इस्तगासा किस प्रकार पेश करना होता है।

  1. हमारे द्वारा सबसे पहले एक अपराधिक अधिवक्ता नियुक्त करना होता है जोकि अपराधिक मुकदमा लड़ने में पारंगत हो और निपुण हो ऐसे अधिवक्ता को नियुक्त करना होता है।
  2. उसके बाद पुलिस जब हमारी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर पाती है तो इस्तगासा पेश करने से पहले एक प्रार्थना पत्र पुलिस उपायुक्त के नाम जय यह रजिस्टर्ड डाक से भिजवा ना होता है और एक संबंधित थाना अधिकारी को भिजवा ना होता है रजिस्टर्ड डाक से और दोनों की फोटो प्रति अपने पास रखनी होती है।
  3. और उसके पश्चात अपने देवता द्वारा एक इस्तगासा से का ड्राफ्ट तैयार करवाया जाता है और उसके साथ पुलिस उपायुक्त को भेजे गए प्रार्थना पत्र की फोटो प्रति और थाना अधिकारी को भेजे गए प्रार्थना पत्र की फोटो प्रति दस्तावेजों के साथ संलग्न करनी होती है और रजिस्टर डाक की रसीद भी संलग्न करनी होती है और अपना पहचान पत्र दस्तावेजों के रूप में संलग्न करता है
  4. कोई और उसके पश्चात इस्तगासा प्रार्थना पत्र के साथ अधिवक्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाता है।
  5. उसके पश्चात न्यायालय द्वारा पुलिस से धारा 154 सीआरपीसी के अंतर्गत रिपोर्ट मांगती है उसके बाद इस्तगासा दर्ज करवाने वाले व्यक्ति के बयान न्यायालय के समक्ष लिए जाते हैं और न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर दिया जाता है उसके पश्चात पुलिस द्वारा मामला या मुकदमा दर्ज करके अनुसंधान जारी कर दिया जाता है और न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर ही जाती है।

इस्तगासा में अधिवक्ता की क्यों आवश्यकता होती है?

इस्तगासे में अधिवक्ता की जरूरत क्यों होती है इस बारे में हम आपको पूर्ण रूप से बताएंगे कि न्यायालय के समक्ष इस्तगासा या परिवाद दायर करने के लिए एक निपुण अपराधिक मुकदमों में पारंगत वकील नियुक्त करना होता है और अपनी तरफ से वकालतनामा देना होता है उसके पश्चात आप की तरफ से उस अधिवक्ता द्वारा पैरवी की जाती है और न्यायालय के समक्ष आपका इस्तगासा प्रस्तुत किया जाता है और अधिवक्ता द्वारा आपके तरफ से तथ्यों और सबूतों को फाइल के साथ या इस तरह से के साथ संलग्न करना होता है और आपकी तरफ से बहस अधिवक्ता द्वारा ही की जाती है इसलिए इस तरह से में भी अधिवक्ता की जरूरत आवश्यक है।

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3 thoughts on “इस्तगासा क्या होता है इसे को दायर कर सकता है? 1 पूरी जानकारी”

  1. आपके द्वारा उपलब्ध करवायी कानूनी जानकारी उपयोगी है । कृपया भाषा शुद्ध करवाये। जिससे
    आपका मक़सद और प्रभावी रहेगा।

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